
8 अक्टूबर 2022..जोधपुर के भदवासिया क्षेत्र के कीर्ति नगर में एक के बाद एक 7 सिलेंडर ब्लास्ट होते हैं और 16 लोग झुलस जाते हैं। हादसे में 10 लाेगों की मौत भी हो जाती है। इसके 2 महीने बाद ही 8 दिसंबर को जोधपुर के शेरगढ़ के भूंगरा में ऐसा ही हादसा होता है। 61 लोग झुलसे और अब तक 35 की मौत हो चुकी है।
इन दोनों हादसे में एक समानता थी…मरने और झुलसने वालों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे। और, दूसरी बड़ी समानता इस हादसे में जलने वालों का दर्द।
शेरगढ़ ब्लास्ट में 6 लोग डिस्चार्ज हो चुके हैं, बाकी 15 अब भी हॉस्पिटल में एडमिट है, बताया जा रहा है ये भी जल्दी से स्वस्थ हो जाएंगे। लेकिन, इस हादसे के घाव इन्हें जीने नहीं देंगे। जब ये घर लौट जाएंगे तो ये ढंग से सो नहीं पाएंगे, शरीर की जलन तड़पने को मजबूर कर देगी। और, ये दर्द बता रहे है कीर्ति नगर गैस हादसे में सही होकर घर लौटे वे तीन लोग जो आज भी इस हादसे को याद करते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
इनमें 11 साल का नक्ष, 50 साल के भोमाराम जोशी और उनकी 2 साल की पोती खुशी। घायलों और पीड़ित परिवार ने बताया वे अब न जीने में रहे और न मरने में…
2 साल की मासूम खुशी दर्द से तड़प रही है
कीर्ति नगर में रहने वाले भाेमाराम लाहौर के यहां ब्लास्ट हुआ था। इसके ठीक सामने भोमारा जोशी की दुकान थी। इस हादसे में भोमाराम 50 और 2 सााल की मासूम पोती 20 फीसदी झुलस गई। भोमाराम बताते हैं कि 2 साल की पोती अभी ढंग से बोल भी नहीं पा रही लेकिन उसके जख्म अभी भरे नहीं है।
इस हादसे में उसके हाथ-पैर और गर्दन का हिस्सा झुलस गया था। अब भी दर्द होता है तो चीख पड़ती है। आंख से आंसू बहते रहते हैं। उसके शरीर पर अब भी ये जलने वाले निशान है।
मै अब भी पीठ के बल सो नहीं पा रहा, दुकान जल गई, रिक्शा भी नहीं चला पा रहा
हादसे को 2 महीने बीत चुके हैं लेकिन पोती के साथ झुलसे भोमाराम जोशी अब कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। इस हादसे में 50 प्रतिशत तक झुलस गए थे। भोमाराम जोशी बताते हैं कि उनकी पीठ इस हादसे में बुरी तरह से झुलस गई थी। अब भी हॉस्पिटल जाकर पटि्टयां करवा रहा हूं। हालत ऐसी है कि पीठ के बल सो भी नहीं पता। कई बार तो दर्द और जलन इतनी होती है कि पूरी रात नींद नहीं आती।
2 महीने से स्कूल नहीं जा पा रहा है 11 साल का नक्ष


11 साल का नक्ष इस हादसे में 35% से ज्यादा झुलस गया था। 12 दिन अस्पताल में भर्ती रहा। हॉस्पिटल से तो सही होकर घर आ गया लेकिन उसके साथ जो बीत रही है वह कोई नहीं जानता। हादसे के बाद से वह शर्ट तक नहीं पहन पा रहा है। मैं शर्ट पहनना भूल गया हूं। इससे पहले ये हालात थे कि मैं बनियान भी पहनता तो जलन होने लगती। इतनी सर्दी में अब बनियान पहनना शुरू किया है। और, इसी वजह से मैं स्कूल भी नहीं जा पा रहा हूं।
हादसे में कंंधे और सीने का हिस्सा बुरी तरह से झुलस गए थे। शर्ट पहनता हूं तो जलने वाले हिस्से में दर्द होता है। एग्जाम देने स्कूल गया था। गलती से बच्चे ने छू लिया तो इतना दर्द होता है कि सहन भी नहीं कर पाता। इस हादसे में नक्ष की मां भी शिकार हो गई थी।



